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इलाहाबाद में भी है 'टीम सावरकर'

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जयंती पर विशेष
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पांच गांवों को गोद लेकर जुटे हैं बदलाव लाने में

हिमांशु मिश्र, इलाहाबाद : स्वतंत्रता सेनानी और राष्ट्रवादी नेता विनायक दामोदर सावरकर आज भी तमाम देशवासियों के दिल में बसते हैं। अपने विचारों से। कुछ तो उन्हें अपना आदर्श मानते हैं। ऐसे लोग सिर्फ महाराष्ट्र में ही नहीं हैं, प्रयाग में भी हैं। बहरिया में नई बाजार मोल्हापुर निवासी युवा इंजीनियर कुलदीप पांडेय तो सावरकर से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अच्छी खासी नौकरी छोड़ दी। 'टीम सावरकरÓ का गठन किया और निकल पड़े हैं गांवों की दशा और दिशा बदलने।
कुलदीप की शुरुआती पढ़ाई मुंबई में हुई थी। पिता शिवदत्त पांडेय हीरा व्यवसायी हैं। इंटरमीडिएट के बाद उन्होंने बीटेक की उपाधि हासिल की और मल्टीनेशनल कंपनी में बतौर इंजीनियर काम करने लगे। मुंबई यूनिवर्सिटी में आयोजित एक सेमिनार में उन्होंने वीर सावरकर के बारे में पहली बार जानकारी पाई। यहीं से उनकी दिलचस्पी विनायक दामोदर सावरकर में बढ़ गई। वह उनके विचारों से प्रेरित होकर कुछ अलग करने की सोचने लगे। उन्हें लगा कि वह गांवों में यह काम कर सकते हैं। इसलिए पिछले दो साल से कुलदीप और उनके साथी गोद लिए गांवों में सक्रिय हैं। टीम से तकरीबन 30 युवा जुड़े हैं। फूलपुर क्षेत्र के जमुनीपुर, रिठङ्क्षहया, छिवैंया, कतवारुपुर, लीलापुर गांव को गोद लिया है युवाओं ने। एजेंडे में है शिक्षा, स्वास्थ्य व रोजगार।
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बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे
विनायक दामोदर सावरकर का जन्म 28 मई 1883 को मुंबई से लगे नासिक में हुआ था। वह न केवल स्वाधीनता संग्राम के तेजस्वी सेनानी थे, अपितु चिंतक, लेखक, कवि, ओजस्वी वक्ता भी थे। उनकी पुस्तक 'फस्र्ट इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस 1857Ó ने अंग्रेजी हुकूमत को हिला दिया था। देश की आजादी के लिए कई बार वह जेल भी गए। यहां उन्होंने कई पुस्तकें लिखी जो आज भी पढ़ी जाती है।