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मथुरा में उपद्रव, एसपी और दारोगा शहीद

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राजकीय उद्यान जवाहरबाग को कब्जाकर सत्याग्रह की आड़ में समानांतर सरकार चलाने वाले उपद्रवियों ने हिंसा का नंगा नाच किया। उद्यान को खाली कराने पहुंची पुलिस और डीएम पर अराजक कथित सत्याग्र्रहियों ने गोलियों की बौछार कर दी। इससे एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ संतोष यादव शहीद हो गए। बारह पुलिसकर्मियों को भी गोलियां लगी हैं। डीएम राजेश कुमार भी छर्रे लगने से जख्मी हुए हैं।  गुस्सायी फोर्स और पब्लिक ने जवाहरबाग में इनके ठिकानों में आग लगा दी। गोलीबारी में डेढ़ दर्जन से ज्यादा उपद्रवियों के भी मरने की सूचना है, लेकिन इसकी आधारिक पुष्टि नहीं हुई है।
 पिछले दो साल से राजकीय उद्यान जवाहर बाग में कब्जा जमाए इन कथित सत्याग्रहियों के खिलाफ ऑपरेशन की तैयारियां अप्रैल से चल रही थीं। गुरुवार शाम करीब सवा पांच बजे फोर्स लेकर अफसरों ने जवाहरबाग को चारों ओर से घेर लिया। अफसर फोर्स लेकर अंदर पहुंचे तो हिंसक भीड़ ने नारेबाजी करते हुए जबरदस्त प्रतिरोध किया। मोर्चा संभाल कर अचानक ताबड़तोड़ फायङ्क्षरग शुरू कर दी। जवाब में पुलिस ने भी फायर खोल दिए। इसके बाद तो गोलियों की तड़तड़ाहट के बीच जवाहरबाग से विस्फोट के धमाके होने लगे। कथित सत्याग्रहियों की ओर से जबरदस्त फायङ्क्षरग के आगे जवान संभल नहीं पाए और बारह सिपाही घायल हो गए। दो गोली एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी के सिर में लगी और एसओ फरह संतोष यादव की आंख में गोली लगी। दोनों को स्वर्ण जयंती हॉस्पीटल ले जाया गया जहां एसओ को तत्काल मृत घोषित कर दिया गया। इलाज के दौरान देर रात एसपी सिटी ने भी दम तोड़ दिया।

उपद्रवी सत्याग्रही पेड़ों पर चढ़कर फायङ्क्षरग कर रहे थे। इस बीच धमाके भी हो रहे थे। इस बीच इनका नेता रामवृक्ष यादव और उसके साथ फायरिंग करने वाले लोग पीछे के गेट से भाग गए। फायरिंग रुकी तो फोर्स और गुस्सायी भीड़ ने इनकेठिकानों में आग लगा दी। इनके परिवार की महिलाएं और बच्चे दहशत के मारे भाग गए।  पूरे शहर में अफरातफरी और अफवाहों का बाजार गर्म है। पुलिस की गोलीबारी में डेढ़ दर्जन से अधिक उपद्रवी भी मारे गए हैं लेकिन प्रशासन पुष्टि नहीं कर रहा है। इधर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निर्देश पर मथुरा में हुई घटना की जांच के लिए आगरा के कमिश्नर प्रदीप भटनागर को जांच अधिकारी नामित किया गया है। देर रात राज्य सरकार के प्रवक्ता ने यह जानकारी दी।
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जवाहर बाग में थी समानांतर सरकार
अटपटी मांगों को पूरी कराने की जिद पर अड़े कथित सत्याग्रही किसी दहशतगर्द से कम नहीं थे। वह राजकीय उद्यान जवाहरबाग में ठहरने के बाद लगातार ङ्क्षहसा कर रहे थे। कई बार उनका पुलिस से संघर्ष हुआ तो उद्यान विभाग और कलक्ट्रेट के कर्मचारी भी नहीं बख्शे। सागर मप्र से दिल्ली कूच के दौरान 18 अप्रैल 2014 को जवाहर बाग में विश्राम के बहाने कथित सत्याग्र्रही रुके और फिर आगे नहीं बढ़े। यहां अपनी समानांतर सरकार चलाने लगे।
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 कब्जे की पहली रात से अब तक
राजकीय जवाहरबाग के स्टोर पर कब्जा कर लिया।  29 अप्रैल 2014 को उद्यान विभाग ने नोटिस जारी किया कि उद्यानों की नीलामी नहीं हो पा रही। इससे करीब 18 लाख रुपये का उद्यान विभाग को नुकसान हुआ। राजकीय नलकूप पर भी कब्जा किया। अब तक करीब तीन लाख रुपये की उद्यान विभाग की बिजली खर्च कर दी। फिर चोरी से बिजली जलाई। सरकारी कार्यालयों में कार्यदिवस के दिन लाउडस्पीकर लगाकर तेज आवाज में प्रवचन करना और कर्मचारियों को डराना-धमकाना आम बात हो गई। चार अप्रैल 2016 को तहसील पर हमला कर अधिवक्ताओं और कर्मचारियों से मारपीट की।
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घटना डीजीपी की विफलता : केशव
भाजपा ने मथुरा के जवाहर बाग घटना की कठोर निंदा की है। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सुपरसीड डीजीपी कानून-व्यवस्था संभालने में पूरी तरह विफल हैं। उन्होंने मामले की न्यायिक जांच की मांग करते हुए कहा कि मथुरा के जवाहर बाग में दो वर्षों से चल रहे प्रकरण में ऐसा क्या हुआ कि अंतरराष्ट्रीय महत्व के स्थान को आग के हवाले कर दिया गया। यह प्रकरण प्रशासनिक लापरवाही और खराब कानून-व्यवस्था का परिणाम है। प्रदेश में अराजकता का बोलबाला है।