लॉस एंजिलिस स्थित कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी (यूसीएलए) में बुधवार को हुई प्रोफेसर की हत्या करने वाला छात्र भारतीय है। उसकी पहचान भारतीय शोध छात्र मैनक सरकार के रूप में हुई है। वह यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर विलियम क्लग से उसके कंप्यूटर कोड चुराने को लेकर अरसे से नाराज था। अपनी थीसियस पर पिछले दस साल से काम कर रहे मैनक को उसके प्रोफेसर क्लग ने पास नहीं किया था।
भारत में जन्मे 38 वर्षीय मैनक सरकार ने बुधवार की सुबह अचानक कैलीफोर्निया यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर क्लग पर 9एमएम सेमी आटोमैटिक पिस्तौल से हमला कर दिया था। 39 वर्षीय प्रोफेसर विलियम क्लग को कई गोलियां मारने के बाद उसने अपनी भी जान दे दी थी। पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है। लेकिन इसके बारे में उसने जानकारी देने से इन्कार किया है।
लॉस एंजिलिस के पुलिस चीफ चार्ली बेक ने गुरुवार को बताया कि हत्या के आरोपी मैनक के मिनिसोटा स्थित घर से एक 'किल लिस्टÓ बरामद हुई है। इस सूची में उसके प्रोफेसर क्लग का भी नाम है। इस सूची में शामिल एक महिला भी मिनिसोटा में मृत पाई गई है। बेक ने बताया कि इस लिस्ट में एक अन्य प्रोफेसर का भी नाम है जिसे कोई चोट नहीं पहुंची है। बताया जाता है कि मैनक सरकार दो पिस्तौल लेकर मिनिसोटा से कार चलाते हुए लॉस एंजिलिस क्लग समेत दो प्रोफेसरों की हत्या करने के इरादे से ही आया था।
लॉस एंजिलिस टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि मैनक सरकार यूसीएलए में सॉलिड मैकेनिक्स में पीएचडी कर रहा था। मैनक ने अपने मेंटर विलियम क्लग पर अपने कंप्यूटर से सारे कोड चुराने का आरोप लगाया था। उसका कहना था कि प्रोफेसर ने उसका कंप्यूटर कोड किसी और शोध छात्र को दे दिया था। सरकार ने 10 मार्च को सोशल मीडिया पर लिखा था, 'विलियम क्लग प्रोफेसर होने के योग्य नहीं है। वह बीमार मानसिकता का व्यक्ति है। मैं यूसीएलए आने वाले हर नए छात्र को उससे दूर रहने की सलाह देता हूं। उसने मुझे बर्बाद कर दिया।Ó
मैनक सरकार ने 2000 में आइआइटी खडग़पुर से एयरोस्पेस इंजीनियङ्क्षरग में स्नातक किया था। इसके बाद उसने स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से पोस्ट ग्रेजुएशन किया। यूसीएलए में प्रोफेसर क्लग के अधीन वह शोध छात्र रहा था। वह क्लग रीसर्च ग्रुप का भी सदस्य था। इसमें ग्रुप में मैनक के अलावा भी पीएचडी के पांच अन्य छात्र शामिल हैं। यह छात्र बायोमेकैनिक्स पर शोध कर रहे थे। उस दौरान वह उनकी जमकर तारीफ करता था। 2013 में अपना शोध कार्य जमा करते हुए उसने लिखा था, 'मेरा गुरु होने के लिए धन्यवाद।Ó
प्रोफेसर क्लग के साथ काम करने वाले अन्य लोगों ने मैनक सरकार के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि क्लग बेहद सहयोगी और नम्र स्वभाव के थे। उन पर ऐसे आरोप लगाने के बारे में कोई नहीं सोच सकता। एक वेबसाइट के अनुसार मैनक सरकार वर्ष 2006 से पीएचडी कर रहा था। लेकिन अन्य छात्रों के शोध काल से दो साल अधिक बीतने के बावजूद उसकी थीसियस को हरी झंडी नहीं मिली थी। आइआइटी खडग़पुर के निदेशक पार्थ प्रतिम चक्रवर्ती ने घटना पर शोक जताया है।
