-पूर्व मंत्री आरके चौधरी भी बागी, छोड़ी बसपा
कहा, मायावती ने बसपा को बनाया रियल स्टेट कंपनी
-अगला सियासी फैसला 11 जुलाई की बैठक में लेंगे
लखनऊ : आठ ही दिन में बहुजन समाज पार्टी को दूसरा बड़ा झटका लगा है। स्वामी प्रसाद मौर्य के बाद पूर्व मंत्री आरके चौधरी ने भी गुरुवार को मायावती पर पार्टी को रियल स्टेट कंपनी बनाने का आरोप लगाते हुए बसपा छोड़ दी। चौधरी अगला सियासी फैसला 11 जुलाई को होने जा रही समर्थकों की बैठक में लेंगे।
बसपा सुप्रीमो के रवैये से आहत चौधरी ने गुरुवार को मायावती पर जमकर भड़ास निकाली। चौधरी ने कहा कि बसपा अब चाटुकारों के इशारे पर चलायी जा रही है। मायावती ने डॉ. भीमराव अंबेडकर व स्व. कांशीराम के आदर्शों से किनारा कर सिर्फ दौलत कमाना शुरू कर दिया है। ऐसे में मिशन से जुड़े सभी वर्कर बसपा में घुटन महसूस कर रहे हैं। चौधरी ने बसपा छोड़ कर जाने वालों का सिलसिला जारी रहने का दावा भी किया। चौधरी ने टिकट नीलाम करने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि कांशीराम भी मायावती पर पैसा बटोरने की हवस का आरोप लगाते थे। इसी हवस के कारण बसपा सामाजिक परिर्वतन आंदोलन से भटक चुकी है। जो कार्यकर्ता पैसा बटोरने में मदद नहीं करता उसे किनारे कर दिया जाता है। अब बसपा में पहले टिकट आवंटन किए जाते हैं, फिर नीलामी शुरू होती है। जो भी सर्वाधिक बोली लगाने में कामयाब रहता है, उसको ही प्रत्याशी घोषित किया जाता है।
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बसपा में आकर गलती की
जुलाई 2001 में बसपा से बाहर किए गए चौधरी ने करीब 11 वर्ष आठ महीने राष्ट्रीय स्वाभिमान पार्टी चलायी और अप्रैल 2013 में बसपा में वापसी करके वर्ष 2014 में मोहनलालगंज सीट से लोकसभा चुनाव भी लड़ा। अब चौधरी ने बसपा में वापसी को अपनी गलती कहा है। उनका कहना था कि कांशीराम ने छह हजार जातियों में विभक्त किए गए बहुजन समाज को एकजुट किया पर अब जिसकी सौदेबाजी मायावती करती हैं। बसपा में वापसी के बाद भी उनकी स्थिति तीसरे दर्जे के नेता जैसी रही। इलाहाबाद व मीरजापुर क्षेत्र का जोनल कोआर्डिनेटर तो बनाया लेकिन अहम फैसलों में उनकी भूमिका नहीं थी।
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मौर्य के साथ जाने पर चुप्पी
बसपा के बागी स्वामी प्रसाद मौर्य द्वारा आहूत एक जुलाई की बैठक में भाग लेने के सवाल को चौधरी ने खामोशी से टाला। उनका कहना था कि वह स्व. कांशीराम, शाहूजी महाराज, पेरियार व डॉ. अंबेडकर के सामाजिक परिर्वतन आंदोलन के कार्यकर्ता रहे हैं, इसलिए सहयोगियों की सहमति लेकर ही अगला कदम उठाया जाएगा। आगामी 11 जुलाई की बैठक में कोई फैसला होगा।
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माफी मांग कर आए पर सुधरे नहीं
चौधरी की बगावत का बसपा पर कोई असर नहीं पडऩे का दावा करते हुए पूर्व सांसद ब्रजेश पाठक ने कहा कि पार्टी विरोधी गतिविधि व अनुशासनहीनता के आरोप में आरके चौधरी को वर्ष 2001 में भी बर्खास्त किया गया था। लेकिन, गलती का अहसास कर लेने और बहनजी से माफी मांगने पर उन्हें सुधरने का मौका दिया गया। वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव भी लड़ाया, अब विधानसभा के चुनाव का टिकट मांग रहे थे। बहनजी ने उन्हें लोकसभा चुनाव की तैयारी में जुटे रहने को कहा था। स्वास्थ्य ठीक नहीं होने के कारण चौधरी अब पहले की तरह सक्रिय नहीं रह पाते थे। उनके पार्टी छोडऩे से बसपा पर कोई असर नहीं पड़ेगा।