- माइक्रो मैनेजमेंट से पहले बूथ मैनेजमेंट
- सवा लाख कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद बनाएंगे शाह
- उम्मीदवारों के चयन के लिए होगा सख्त मापदंड
आगामी उत्तर प्रदेश चुनाव में भाजपा लोकसभा की तर्ज पर ही उतरेगी। जहां पार्टी अध्यक्ष अमित शाह बूथ स्तर तक अपने कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने में जुट गए हैं, वहीं उम्मीदवारों की योग्यता का परोक्ष रूप से भी आकलन शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि उम्मीदवारों के चयन का मापदंड लोकसभा चुनाव से भी सख्त हो सकता है।
यूं भाजपा के लिए उत्तर प्रदेश में मौजूद रहे 'डार्क जोनÓ को शाह ने लोकसभा चुनाव के वक्त ही दुरुस्त कर लिया था। इन दो सालों में आई शिथिलता को भी झाडऩे-पोंछने का काम शुरू हो गया है। अगले चार-पांच महीने में शाह उत्तर प्रदेश में सवा लाख कार्यकर्ताओं से मिलेंगे। बूथ इंचार्ज से सीधा संवाद और जीत का मंत्र देने का काम चल रहा है। कानपुर में पहली बैठक हुई थी। मंगलवार को वह ब्रज क्षेत्र के कासगंज में बूथ इंचार्ज का सम्मेलन करेंगे। इसी तरह वह बाकी बचे चार क्षेत्रों में बैठक कर अभी से बूथ दुरुस्त करने में जुट गए हैैं। उन्हें समन्वय बनाकर काम करने का निर्देश दिया गया है। अलग-अलग क्षेत्रों का प्रभार पहले ही बांटा जा चुका है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहारनपुर में बड़ी रैली कर चुके हैैं। शाह इलाहाबाद और वाराणसी में रैली कर चुके हैं तो केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी रविवार को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसानों को संबोधित किया। 13 जून को इलाहाबाद में प्रधानमंत्री समेत कई बड़े नेता मौजूद होंगे। अगले छह महीने में सभी बड़े नेता लगभग पूरे उत्तर प्रदेश का दौरा कर चुके होंगे।
इन सबके साथ ही उम्मीदवार को लेकर भी तैयारी शुरू हो गई है। सूत्रों का कहना है कि उम्मीदवारों को लेकर आकलन का एक दौर पूरा हो चुका है। एक भी सीट का फैसला चेहरे पर नहीं, बल्कि संभावित उम्मीदवार की लोकप्रियता और क्षेत्र में उसकी सक्रियता आदि को देखकर होगा। जातिगत समीकरण तो अहम होगा ही। ऐसे में कुछ बड़े और पुराने नेताओं को सीट बदलने को भी कहा जा सकता है। बताते हैं कि उम्मीदवारी तय करने के लिए तीन-चार दौर में आकलन होगा। अंतिम मौके पर दूसरे दलों से आने वाले जिताऊ उम्मीदवारों को भी गले लगाया जा सकता है। लेकिन इस क्रम में ऐसे किसी बाहरी या भीतरी नेता को टिकट मिलना मुश्किल है जिसकी छवि भ्रष्टाचारी या अपराधी की रही है।
नारों और चुनावी मुद्दों को भी रूप दिया जाने लगा है। बताते हैं कि 'बदलावÓ के नारों में अलग-अलग आबादी और समुदाय को भी संबोधित करने की कोशिश हो सकती है। एक तरफ केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाने वाले नारे होंगे तो दूसरी ओर सपा-बसपा को कठघरे में खड़ी करने वाली घटनाओं का भी जिक्र होगा।