नई दिल्ली (3 अक्टूबर):
उरी हमले के बाद से ही देशभर में पाकिस्तान के खिलाफ लोगों में जबरदस्त गुस्सा है। भारत ने पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए कई कदम उठाए हैं। भारतीय सेना ने पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक कर आतंकी कैंपों को बर्बाद किया। वहीं भारत सरकार पाकिस्तान के साथ सिंधु नदी जल समझौता और सर्वाधिक तरजीही राष्ट्र (एमएफएन)का दर्जा वापस लेने की तैयारी कर रही है। लेकिन पाकिस्तान कि नापाक हरकतें जारी हैं। पाकिस्तान लगातार भारत में आतंकी घुसपैठ कराने के लिए सीजफायर का उल्लघंन कर रहा है। यहां तक की उसकी इन हरकतों में चीन भी उसका साथ दे रहा है। चीन ने पाकिस्तान की शह पर तिब्बत में ब्रह्मपुत्र का पानी रोका। यूएन में अपने वीटो पावर का उपयोग करके जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी मसूद अजहर को आतंकी घोषित करने का विरोध किया है। भारत के एनएसजी सदस्यता के प्रयास में वह रोड़ा बना। यह भारत के खिलाफ पाक की 'चीनी साजिश' है। जिसका भारत की जनता ने मुंहतोड़ जवाब देने का मन बना लिया है। देशभर में चीन के बने समान का बहिष्कार करने की अपील की जा रही है। यही नहीं चीन के खिलाफ भारतीयों का गुस्सा सोशल मीडिया पर भी दिख रहा है। ट्वीटर, फेसबुक पर लोग #BoycottChineseProducts लिखकर चीनी प्रोडक्ट्स पर बैन लगाने और इनके इस्तेमाल नहीं करने की अपील कर रहे हैं। स्वामी रामदेव और भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय खुद इस आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। उन्होंने चीन के सामान, चीन के साथ व्यापार का बहिष्कार करने का आह्वान किया है। आइए जानते हैं भारत-चीन का कितना व्यापार है और देश में कैसे 'मेड इन चाइना' की बाढ़ आ गई...
भारत-चीन व्यापार
- भारत-चीन के बीच व्यापार संबंध मुख्य रिश्ते का आधार है।
- दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं दुनिया की बड़ी अर्थव्यस्थाओं में गिनी जाती है।
- दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते की शुरुआत साल 1978 में हुई थी।
- ASSOCHAM के मुताबिक 2001 और 2014 के बीच चीन से आयात लगभग दोगुना हुआ।
- इस बीच भारत में चीनी सामानों का आयात रिकॉर्ड 34 गुना तक बढ़ चुका है।
- चीन से वस्तुओं का आयात भारत के कुल आयात के 13 फीसदी से ज्यादा है।
- भारत और चीन के बीच अगर व्यापार की बात करें, तो ये 2003-2004 में 7 अरब डॉलर था।
- जो 2014-15 में बढ़कर लगभग 70 अरब डॉलर यानी 4.70 लाख करोड़ का हो गया है।
- जिसमें से भारत चीन को सिर्फ 79 हजार करोड़ रुपए का निर्यात करता है।
- जबकि 3.87 लाख करोड़ का भारत चीन से आयात करता है, यानी व्यापार घाटा 3 लाख करोड़ है।
- भारत-चीन के बीच व्यापार संबंध मुख्य रिश्ते का आधार है।
- दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं दुनिया की बड़ी अर्थव्यस्थाओं में गिनी जाती है।
- दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते की शुरुआत साल 1978 में हुई थी।
- ASSOCHAM के मुताबिक 2001 और 2014 के बीच चीन से आयात लगभग दोगुना हुआ।
- इस बीच भारत में चीनी सामानों का आयात रिकॉर्ड 34 गुना तक बढ़ चुका है।
- चीन से वस्तुओं का आयात भारत के कुल आयात के 13 फीसदी से ज्यादा है।
- भारत और चीन के बीच अगर व्यापार की बात करें, तो ये 2003-2004 में 7 अरब डॉलर था।
- जो 2014-15 में बढ़कर लगभग 70 अरब डॉलर यानी 4.70 लाख करोड़ का हो गया है।
- जिसमें से भारत चीन को सिर्फ 79 हजार करोड़ रुपए का निर्यात करता है।
- जबकि 3.87 लाख करोड़ का भारत चीन से आयात करता है, यानी व्यापार घाटा 3 लाख करोड़ है।
बेडरूम में बाथरूम तक चीनी सामान
- करीब एक दशक पहले भारत के बाजार में चीनी उत्पादों की बाढ़ आई थी।
- मेड इन चाइना सामान अधिक टिकाऊ और मजबूत न सही, लेकिन अपेक्षाकृत सस्ता होता है।
- सस्ता होने से कारण व्यापारियों और आम जनता में चीनी सामान पहली पसंद बन गए।
- चीन का थोक उत्पादन पर बल और भारत की उत्पादन क्षमताओं में कमियां इसकी जिम्मेदार थीं।
- साथ ही चीन में 46 फीसदी स्किल वर्कस हैं जबकि भारत में सिर्फ 2 फीसदी।
- चीन निर्मित सामान अब इलेक्ट्रॉनिक सामानों तक ही सीमित नहीं रह गए।
- दीवाली, होली, रक्षाबंधन जैसे प्रमुख त्योहारों पर चाइना मेड सामान की मार्केट में भरमार हो गई।
- देश के सबसे बड़े होलसेल मार्केट सदर बाजार में 'मेड इन चाइना' सामानों की बाढ़ सी आ गई है।
- डेढ़ दशक पहले तक इस बाजार में चीनी सामान की हिस्सेदारी 30 फीसदी थी, जो आज 60-70 है।
- जूते, टीशर्ट, खिलौने, साइकिल, टेलीविजन, कैलकुलेटर, घड़ियां, पंखे, ताले, बैटरियां, साइकिल।
- देवी-देवताओं की प्रतिमाओं से लेकर, फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं, ऑटो पाटर्स भारत में उपलब्ध है।
- ‘यूज एंड थ्रो’ की संस्कृति चीन में रही वही आदात भारत में जनता को लगा दी गई।
- बाथरूम के सामान से लेकर बेडरूम का सामान भारतीय मार्केट में भर गया था।
- इसकी मार कमजोर देसी उत्पादकों पर पड़ी घड़ी, खिलौना, साइकिल उद्योग बर्बादी के कगार पर आ गए।
- कई छोटी इकाइयों पर तो ताला ही पड़ गया, जबकि बड़ी इकाइयां दूसरे उपाय तलाशने लगी।
- चीनी निर्यात पर भारत की निर्भरता को सबसे बेहतर उदाहरण ऊर्जा क्षेत्र है।
- आज भारतीय परियोजनाओं के लिए करीब 80 फीसदी पावर प्लांट उपकरण चीन से मंगाए जाते हैं।
- करीब एक दशक पहले भारत के बाजार में चीनी उत्पादों की बाढ़ आई थी।
- मेड इन चाइना सामान अधिक टिकाऊ और मजबूत न सही, लेकिन अपेक्षाकृत सस्ता होता है।
- सस्ता होने से कारण व्यापारियों और आम जनता में चीनी सामान पहली पसंद बन गए।
- चीन का थोक उत्पादन पर बल और भारत की उत्पादन क्षमताओं में कमियां इसकी जिम्मेदार थीं।
- साथ ही चीन में 46 फीसदी स्किल वर्कस हैं जबकि भारत में सिर्फ 2 फीसदी।
- चीन निर्मित सामान अब इलेक्ट्रॉनिक सामानों तक ही सीमित नहीं रह गए।
- दीवाली, होली, रक्षाबंधन जैसे प्रमुख त्योहारों पर चाइना मेड सामान की मार्केट में भरमार हो गई।
- देश के सबसे बड़े होलसेल मार्केट सदर बाजार में 'मेड इन चाइना' सामानों की बाढ़ सी आ गई है।
- डेढ़ दशक पहले तक इस बाजार में चीनी सामान की हिस्सेदारी 30 फीसदी थी, जो आज 60-70 है।
- जूते, टीशर्ट, खिलौने, साइकिल, टेलीविजन, कैलकुलेटर, घड़ियां, पंखे, ताले, बैटरियां, साइकिल।
- देवी-देवताओं की प्रतिमाओं से लेकर, फर्नीचर और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं, ऑटो पाटर्स भारत में उपलब्ध है।
- ‘यूज एंड थ्रो’ की संस्कृति चीन में रही वही आदात भारत में जनता को लगा दी गई।
- बाथरूम के सामान से लेकर बेडरूम का सामान भारतीय मार्केट में भर गया था।
- इसकी मार कमजोर देसी उत्पादकों पर पड़ी घड़ी, खिलौना, साइकिल उद्योग बर्बादी के कगार पर आ गए।
- कई छोटी इकाइयों पर तो ताला ही पड़ गया, जबकि बड़ी इकाइयां दूसरे उपाय तलाशने लगी।
- चीनी निर्यात पर भारत की निर्भरता को सबसे बेहतर उदाहरण ऊर्जा क्षेत्र है।
- आज भारतीय परियोजनाओं के लिए करीब 80 फीसदी पावर प्लांट उपकरण चीन से मंगाए जाते हैं।
भारतीय उद्योग को लगाई चीनी कंपनियों ने चपत
- भारतीय बाजार में ब्रांड कंपनियों का 25 हजार रुपए में मिलने वाला टेबलेट चीनी ब्रांड में मात्र 2-5 हजार रुपए में मिल जाता है।
- इतना ही नहीं, खिलौने, देवी-देवताओं की मूर्तियां, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे चीनी उत्पाद काफी सस्ते में उपलब्ध हैं।
- होली के मौके पर चीनी रंगों, पिचकारी और स्प्रिंकल्स की भी भारत में भरमार रहती है।
- भारतीय रंग की तुलना में चीनी रंग और पिचकारी 60 फीसद तक सस्ते रहते हैं।
- भारत के रंगों से जुड़े 75 फीसद कारोबार पर चीन ने कब्जा कर लिया है।
- चीनी पटाखों के कारण शिवकाशी का पटाखा उद्योग बर्बादी के कगार पर आ चुका है
- देश में पटाखों का कारोबार करीब 6,000 करोड़ रुपये का है।
- जिसमें से अकेले चीनी पटाखों ने करीब 1000 करोड़ रुपये पर कब्जा कर लिया है।
- सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज की मानें तो सॉफ्टवेयर और संगीत क्षेत्र में धड़ल्ले से चीनी नकली माल बिक रहा हैं।
- फिल्मों में 6500 करोड़ रूपए का तो किताबों में 319 करोड़ का नकली कारोबार है।
- ऑटो सेक्टर में 8300 करोड़ रूपए का तो सॉफ्टवेयर में 2 लाख करोड़ का नकली माल बिक रहा है।
- पिछले साल ऑनलाइन कारोबार के जरिये बेचे गए 40 फीसद चीनी प्रोडेक्ट की गुणवत्ता घटिया और नकली थी।
- भारतीय बाजार में ब्रांड कंपनियों का 25 हजार रुपए में मिलने वाला टेबलेट चीनी ब्रांड में मात्र 2-5 हजार रुपए में मिल जाता है।
- इतना ही नहीं, खिलौने, देवी-देवताओं की मूर्तियां, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान जैसे चीनी उत्पाद काफी सस्ते में उपलब्ध हैं।
- होली के मौके पर चीनी रंगों, पिचकारी और स्प्रिंकल्स की भी भारत में भरमार रहती है।
- भारतीय रंग की तुलना में चीनी रंग और पिचकारी 60 फीसद तक सस्ते रहते हैं।
- भारत के रंगों से जुड़े 75 फीसद कारोबार पर चीन ने कब्जा कर लिया है।
- चीनी पटाखों के कारण शिवकाशी का पटाखा उद्योग बर्बादी के कगार पर आ चुका है
- देश में पटाखों का कारोबार करीब 6,000 करोड़ रुपये का है।
- जिसमें से अकेले चीनी पटाखों ने करीब 1000 करोड़ रुपये पर कब्जा कर लिया है।
- सेंट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज की मानें तो सॉफ्टवेयर और संगीत क्षेत्र में धड़ल्ले से चीनी नकली माल बिक रहा हैं।
- फिल्मों में 6500 करोड़ रूपए का तो किताबों में 319 करोड़ का नकली कारोबार है।
- ऑटो सेक्टर में 8300 करोड़ रूपए का तो सॉफ्टवेयर में 2 लाख करोड़ का नकली माल बिक रहा है।
- पिछले साल ऑनलाइन कारोबार के जरिये बेचे गए 40 फीसद चीनी प्रोडेक्ट की गुणवत्ता घटिया और नकली थी।
चीनी बाजार में भारत की पहुंच आसान नहीं
- भारत भी चीनी मार्केट में लगातार अपने फार्मास्युटिकल, कृषि और आईटी सेवाओं की आसान पहुंच की मांग करता रहा है।
- लेकिन भारत के लिए दवा, आईटी और एग्री कमोडिटीज के चीन को निर्यात में सबसे बड़ी बाधा नॉन टैरिफ बैरियर रही है।
- CII के अनुसार चीन ने अपने यहां ऐसे नियम बना रखे हैं कि भारतीय कम्पनियों या तो वहां मिलने वाले ठेकों के लिए योग्य ही नहीं मानी जाती।
- चीन के कुछ राज्यों में स्थानीय कंपनियों को सब्सिडी दी जाती है जिससे भारतीय कम्पनियां लागत ज्यादा होने से प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाती हैं।
- भारत ने डब्ल्यूटीओ में चीन के खिलाफ भारतीय मीट के आयात पर प्रतिबंध के फैसले पर भी सवाल खड़े किए थे।
- भारत चीन को 40 प्रतिशत लौह-अयस्क निर्यात करता है, अन्य निर्यात वस्तुओं में प्लास्टिक के उत्पाद, इस्पात, रसायन, सोयाबिन तेल हैं।
- भारत भी चीनी मार्केट में लगातार अपने फार्मास्युटिकल, कृषि और आईटी सेवाओं की आसान पहुंच की मांग करता रहा है।
- लेकिन भारत के लिए दवा, आईटी और एग्री कमोडिटीज के चीन को निर्यात में सबसे बड़ी बाधा नॉन टैरिफ बैरियर रही है।
- CII के अनुसार चीन ने अपने यहां ऐसे नियम बना रखे हैं कि भारतीय कम्पनियों या तो वहां मिलने वाले ठेकों के लिए योग्य ही नहीं मानी जाती।
- चीन के कुछ राज्यों में स्थानीय कंपनियों को सब्सिडी दी जाती है जिससे भारतीय कम्पनियां लागत ज्यादा होने से प्रतिस्पर्धा से बाहर हो जाती हैं।
- भारत ने डब्ल्यूटीओ में चीन के खिलाफ भारतीय मीट के आयात पर प्रतिबंध के फैसले पर भी सवाल खड़े किए थे।
- भारत चीन को 40 प्रतिशत लौह-अयस्क निर्यात करता है, अन्य निर्यात वस्तुओं में प्लास्टिक के उत्पाद, इस्पात, रसायन, सोयाबिन तेल हैं।
नकली सामान के निर्यात में सबसे आगे चीन
- चीन हर साल 500 अरब डालर यानी 33 लाख करोड़ रुपए का नकली और पायरेटेड सामान दुनियाभर में सप्लाई करता है।
- वैश्विक स्तर पर जब्त आयातित नकली उत्पादों में 63.2 प्रतिशत के साथ चीन पहले स्थान पर है।
- इसका सर्वाधिक नुकसान यूरोपीय संघ व अमेरिका की कंपनियों को उठाना पड़ रहा है।
- नकली वस्तुओं के व्यापार से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले देशों में अमेरिका पहले नंबर पर है।
- चीन हर साल अमेरिका में 32 लाख करोड़ का निर्यात करता है जिसमें ज्यादातर चीजें नकली होती है।
- आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओइसीडी) की रिपोर्ट से भी यह प्रमाणित हो चुका है।
- सौ से ज्यादा भारतीय कंपनियों को चीनी कंपनियों ने धोखा दिया है।
- खुद भारतीय दूतावास कह चुका है कि चीनी कंपनियों के साथ समझौते करने से पहले जांच-परख लें।
- रसायन, स्टील, सौर ऊर्जा, ऑटो वील, आर्ट एंड क्राफ्ट्स, हार्डवेयर से जुड़ी चीनी कंपनियां धोखाधड़ी में लिप्त रही हैं।
- चीन हर साल 500 अरब डालर यानी 33 लाख करोड़ रुपए का नकली और पायरेटेड सामान दुनियाभर में सप्लाई करता है।
- वैश्विक स्तर पर जब्त आयातित नकली उत्पादों में 63.2 प्रतिशत के साथ चीन पहले स्थान पर है।
- इसका सर्वाधिक नुकसान यूरोपीय संघ व अमेरिका की कंपनियों को उठाना पड़ रहा है।
- नकली वस्तुओं के व्यापार से सबसे अधिक प्रभावित होने वाले देशों में अमेरिका पहले नंबर पर है।
- चीन हर साल अमेरिका में 32 लाख करोड़ का निर्यात करता है जिसमें ज्यादातर चीजें नकली होती है।
- आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (ओइसीडी) की रिपोर्ट से भी यह प्रमाणित हो चुका है।
- सौ से ज्यादा भारतीय कंपनियों को चीनी कंपनियों ने धोखा दिया है।
- खुद भारतीय दूतावास कह चुका है कि चीनी कंपनियों के साथ समझौते करने से पहले जांच-परख लें।
- रसायन, स्टील, सौर ऊर्जा, ऑटो वील, आर्ट एंड क्राफ्ट्स, हार्डवेयर से जुड़ी चीनी कंपनियां धोखाधड़ी में लिप्त रही हैं।
चीनी सामान पर बैन
- भारत सरकार ने चीन से आने वाले घटिया प्रकार के दूध व दुग्ध उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया।
- साथ ही कुछ विशेष प्रकार के मोबाइल फोनों को 24 अप्रैल 2016 में बैन किया।
- इससे पहले 23 जनवरी 2016 को भी चीनी खिलौनों के आयात पर प्रतिबंध लगाया गया था।
- 27 अप्रैल 2016 को लोकसभा में भाजपा की ओर से ही चीनी मांझे का मुद्दा उठाया गया।
- मोदी सरकार ने हाल ही में चीन से आयातित पटाखों पर बैन लगाया है।
- भारत सरकार ने चीन से आने वाले घटिया प्रकार के दूध व दुग्ध उत्पादों पर प्रतिबंध लगाया।
- साथ ही कुछ विशेष प्रकार के मोबाइल फोनों को 24 अप्रैल 2016 में बैन किया।
- इससे पहले 23 जनवरी 2016 को भी चीनी खिलौनों के आयात पर प्रतिबंध लगाया गया था।
- 27 अप्रैल 2016 को लोकसभा में भाजपा की ओर से ही चीनी मांझे का मुद्दा उठाया गया।
- मोदी सरकार ने हाल ही में चीन से आयातित पटाखों पर बैन लगाया है।